
Sunday, July 6, 2008
Wednesday, June 18, 2008
लखनऊ सहारा सिटी का कुछ हिस्सा ढहाया गया

एक निजी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी सरकार के आदेशों पर पुलिस व प्रशासन की मदद से सहारा सिटी का कुछ हिस्सा रातोंरात ढहा दिया गया। चैनल के मुताबिक इससे सहारा परिवार के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह को भी गहरा झटका लगा है। इस कारवाई को प्रशासन ने अतिक्रमणा का नाम दिया है। इस तरह से अचानक हुइ रातोंरात कार्रवाई से सहारा सिटी के मास्टर प्लान के तहत आने वाली कंपाउंड में पड़ते करीब 30 मीटर चौड़ी जगह को गिरा दिया है। वहीं सहारा परिवार का कहना है कि यह कार्रवाई सरकार के पोजेक्ट अंबेडकर पार्क को गोमती नगर से जोड़ने के लिए किया गया है, जो कि सरासर गलत है। सहारा सिटी के जीएम के मुताबिक उसके पास कोर्ट के सारे कागजात मौजूद हैं। जिसमें कहा गया है कि इस जगह पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। इस अतिकमण की मुहिम से सहारा परिवार को तगड़ा झटका लगा है। यह सिटी लखनऊ के उन एरियों में शुमार की जाती है जहां बड़े-बड़े अफसर, नेता रहते हैं।
यह माना जाता है कि सहारा के सुबतो राय और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम के बीच नजदीकी के कारण इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। इससे पहले भी यूपी सरकार मुलायम के चहेतों पर गाज गिरा चुकी है। चाहे अमिताभ बच्चन हों या अंबानी परिवार। खैर चाहे कुछ भी हो सरकार की इस कार्रवाई से नजदीकी लोकसभा चुनावों को लेकर चुनावी सरगर्मियां और तेज होने की संभावना है। ऐसे में देखना है कि सहारा और उनके साथी कौन सा कदम उठाएंगे।
Saturday, June 14, 2008
क्या हो गया था परवीन कुमार को

यूपी के ओपनर बल्लेबाज परवीन कुमार का फाइनल में परफार्मेंस देखकर सभी लोग दंग थे। उनका यही कहना था कि क्या हो गया है इस बल्लेबाज को। गेंद ठीक से बल्ले पर नहीं आ रही थी। मानो ऐसा लग रहा था कि कोई नौसिखिया खेल रहा है। यूपी की तरफ से खेलते हुए परवीन का बल्लेबाजी में रिकार्ड औसत शानदार रहा है। इरफान पठान के आउट होने के बाद परवीन पर सभी की निगाहें थी। एक-एक करके सभी बल्लेबाज आउट हो गए। कप्तान धोनी एक तरफ से खूंटा गाड़े हुए थे। दूसरी तरफ से विकेट की झड़ी लग गई। ऐसे में अगर कोई बल्लेबाज कीज पर टीक गया होता तो टीम इंडिया की फाइनल में जीत पक्की थी।
बता दें कि किट्प्लाई त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल मैच में पाक ने टीम इंडिया को 25 रनों से हरा दिया। पाक के 315 रनों के जवाब में उतरी टीम इंडिया 290 रनों पर ढेर हो गई। भारत की तरफ से धोनी (64), युवराज (56) और गंभीर ने 40 रन बनाए। उधर पाक के ओपनर बल्लेबाज सलमान बट्ट ने शानदार 129 (रिटायर्ड हर्ट) और यूनिस खान ने 108 रन बनाकर शुरू से ही भारत पर दबाव बना दिया, जिससे वे अंत तक उबर नहीं पाए। हालांकि भारत की तरफ से सबसे सफल गेंदबाज परवीन ही रहा, जिसने 10 ओवरों में केवल 37 रन दिए।
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40 पार यानी एक्सपायर (उन तमाम लोगों के लिए जो सोचते समझते हैं, लेकिन काम नहीं करना चाहते)
पत्रकार की कोई उम नहीं होती, लेकिन आजकल के भागमभाग के दौर में उसकी भी एक कैटेगरी निर्धारित हो गई है। चाहे मालिक हो या संपादक वह युवाओं को पसंद करता है। पत्रकारिता में 40 पार होने के बाद पत्रकार एक्सपायर माने जाने लगे हैं। लोगों का मानना है कि इस लाइन में जोश और जज्बे की जरूरत होती है, जोकि 40 पार होने पर संभव नहीं है। युवाओं की बात की जाए तो उन्हें भी दो कैटेगरी में रखा जा सकता है। एक सीखने का वक्त और दूसरा सिखाने का। जाब लगने के बाद काम करने और सीखने का मौका मिलता है। इस एज में युवा पूरे दमखम के साथ काम करते हैं। और इसी जोश और जज्बे की वजह से वे आगे बढ़ते रहते हैं। आजकल उन्हें खुलकर खेलने का भी मौका मिलता है। 30 साल की उम तक वे पत्रकारिता की अधिकांश सीढ़ियां चढ़ चुके होते हैं। इसके बाद वे एक स्थायी पद पर नियुक्त हो जाते हैं। हम बात कर रहे थे एक्सपायर यानी 40 पार लोगों की, जोकि जानकार तो बहुत होते हैं, लेकिन वे अपने पुराने सोच में परिवर्तन नहीं कर पाते हैं। जिस वजह से वे मात खा जाते हैं और जो अपने सोच में परिवर्तन करते रहते हैं, वे आगे चलकर संपादक बन जाते हैं। हालांकि इस तरह की खबरों को एक्सपायर लोग सिर्फ अफवाह करार देते हैं।
Wednesday, June 11, 2008
आखिर क्यों झुपाते हैं अपनी गलतियां

हम अपनी कमी क्यों छुपाते हैं इसलिए नहीं कि हम कमजोर है इसलिए कि हम दूसरों की नजर में सदैव अच्छे बने रहें। कइ बार तो हम सब कुछ जानते हुए भी इतना अंजान बन जाते है कि मानो जैसे कुछ मालूम ही न हो। ऐसी प्रवृति वाले अपने अंदर खुद छांककर देखे कि वे कितने सही और कितने गलत हैं। हम अपनी गलतियों को इतनी आसानी से छिपाजाते है कि सामने वाले को इसकी भनक नहीं लग पाती है। अब अगर काम के दौरान ही गलतियां हो जाएं तो उसे स्वीकारने से पहले ही हम बचने का रास्ता ढूढ लेते हैं। कितनी बार अपनी गलतियों पर जबरदसती परदा डाल देते हैं। कयोंकि सामने वाले कि नजर में हमें अपनी गलतियों के कारणा लज्जित न होना पड़े। आजकल के युवाओं में इस तरह की प्रवृति ज्यादा बढ़ रही है। वे अनुभनहीन होते हुए भी इतने कंफीडेंस से काम करते हैं कि मानो काफी बड़े जानकार हों। हालांकि उनके कार्यों की समीक्षा उनके सीनियर्स कर लेते हैं कि वे कितने पानी में हैं और चाहकर भी कुछ नहीं बोलते हैं। इस बारे में यह मानना है कि हमें अपनी छोटी छोटी गलितयों को इगनोर न करके उस पर सुधार करना चाहिए।
Sunday, June 8, 2008
पंजाब में भास्कर को चाहिए ट्रेनी जर्नलिस्ट
भास्कर को चाहिए ट्रेनी जर्नलिस्ट
अगर आप अपने आसपास की बदलती दुनिया को पहचानने का हुनर रखते हैं, खुद को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त कर सकते हैं और एक चुनौतीपूर्ण कैरियर के लिए तैयार हैं तो हमें आपकी जरूरत है।
योग्यताः आप ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट हैं या फिर हाल ही में आपने फाइनल एग्जाम दिया है तो भी आवेदन कर सकते हैं।
अंतिम तिथिः 15 जून, २००८
पताः दैनिक भास्कर एससीओ-16, पुड्डा काम्पलेक्स, लाडोवाली रोड,
प्रेशिक्षण की अवधिः तीन महीने
स्टाइपेंडः 5,000 रु मासिक
दैनिक जागरण के बाद भास्कर के इस पहल पर आपके क्या सुझाव हैं।
अगर आप अपने आसपास की बदलती दुनिया को पहचानने का हुनर रखते हैं, खुद को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त कर सकते हैं और एक चुनौतीपूर्ण कैरियर के लिए तैयार हैं तो हमें आपकी जरूरत है।
योग्यताः आप ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट हैं या फिर हाल ही में आपने फाइनल एग्जाम दिया है तो भी आवेदन कर सकते हैं।
अंतिम तिथिः 15 जून, २००८
पताः दैनिक भास्कर एससीओ-16, पुड्डा काम्पलेक्स, लाडोवाली रोड,
प्रेशिक्षण की अवधिः तीन महीने
स्टाइपेंडः 5,000 रु मासिक
दैनिक जागरण के बाद भास्कर के इस पहल पर आपके क्या सुझाव हैं।
भास्कर इलेवन के खिलाड़ियों ने दिखाया जौहर

भास्कर इलेवन ने मीडिया इलेवन पर शानदार जीत दर्ज की
रविवार को आर्य कालेज के मैदान में हुए एक बेहतरीन मुकाबले में भास्कर इलेवन ने मीडिया इलेवन पर 18 रनों से शानदार जीत दर्ज की। महीने भर से चल रहे तीखे वाकयुद्ध के बाद आज मैदान पर जौहर दिखाने की बारी थी और भास्कर के खिलाड़ी इस पैमाने पर पूरी तरह खरे उतरे। भड़ासियों को बता दें कि यह मैच भास्कर इलेवन को चैलेंज करके रखा गया था। विपक्षियों ने जीत का दावा भी पहले ही ठोक दिया था। भास्कर के रणबांकुरों ने कैप्टन आलोक सिंह रघुवंशी की अगुवाई में मीडिया इलेवन के दावें की हवा निकाल दी। यह भी गौर करने वाली बात है कि विपक्षी टीम के कुठ खिलाड़ी भास्कर परिवार के ही सदस्य हैं। उन खिलाड़ियों ने भी भास्कर इलेवन को हराने के लिए पुरजोर कोशिश की, लेकिन भास्कर परिवार के सहयोग से भास्कर इलेवन की टीम सभी अपेक्षाओं पर खरी उतरी। बता दें कि विपक्षी टीम ने विभिन्न टीमों से हुए मुकाबले में लगातार सात मैचों में जीत दर्ज की है। इसी घमंड में उन्होंने भास्कर इलेवन को चैलेंज कर दिया। भास्कर इलेवन ने इस चैलेंज को कबूलते हुए उनके ताबूत में कील ठोक दी। विपश्री टीम के खिलाड़ी भास्कर के रणबांकुरे के जौहर देखकर चारों खाने चित हो गए। आज सुबह टास जीतकर मीडिया इलेवन के कप्तान मोहित ने पहले फील्डिंग करने का निर्णय लिया। ओपनर बल्लेबाज कप्तान आलोक सिहं रघुवंशी और दिनेश भट्ट ने मीडिया को शानदार शुरुआत दी। मैच के दूसरी ही गेंद पर कप्तान ने स्टेट पर शानदार चौका जमाया। मीडिल आर्डर के बल्लेबाज सन्नी (95), राहुल, नितिन यादव ने शानदार बल्लेबाजी कर मीडिया इलेवन के लिए 20 ओवरों में 201 रनों का लक्ष्य रखा। जवाब में खेलते हुए मीडिया इलेवन के ओपनर बल्लेबाजों मोहित और सुनील ने शानदार शुरुआत दी। इन दोनों खिलाड़ियों के आउट होने के बाद टीम हतोत्शाहित हो गई। हालांकि मीडिल आर्डर के बल्लेबाज तरसेम दियोगण ने अच्छी बल्लेबाजी कर अपनी टीम को विजय लक्ष्य के नजदीक पहुंचा दिया, लेकिन राहुल श्रीवास्तव, आकाश रावल, सन्नी, दिनेश ने अपनी चतुराई भरी गेंदबाजी से निचले कम के बल्लेबाजों को झका दिया और मीडिया इलेवन को 18 रनों से मात दी। अंत में भास्कर इलेवन के खिलाड़ी मैदान पर जीत के नारे लगाते हुए अपने दफ्तर पहुंचे और दफ्तर के सामने भास्कर परिवार के लोगों ने कप्तान सहित सभी खिलाड़ियों का स्वागत किया।
टीम- आलोक सिंह रघुवंशी (कप्तान), नितिन यादव (उपकप्तान), दिनेश भट्ट, राहुल श्रीवास्तव, आकाश रावल, सन्नी, महेश, प्यार सिंह, अमित, मुकेश, सुनील।
मैच जीतने पर भास्कर के स्थानीय संपादक राजीव सिंह, सिटी चीफ कुमार अभिमन्यु, विशेष संवाददाता अशोक सिंघी, योगेंऱद भदौरिया, सिटी डेस्क इंचार्ज नवीन गुप्ता, सीनियर सब एडिटर अनिल भारदाज, मनीष सिंह, चीफ फोटोगाफर कुलदीप काला ने विजयी टीम के सदस्यों को शुभकामनाएं दी।
रविवार को आर्य कालेज के मैदान में हुए एक बेहतरीन मुकाबले में भास्कर इलेवन ने मीडिया इलेवन पर 18 रनों से शानदार जीत दर्ज की। महीने भर से चल रहे तीखे वाकयुद्ध के बाद आज मैदान पर जौहर दिखाने की बारी थी और भास्कर के खिलाड़ी इस पैमाने पर पूरी तरह खरे उतरे। भड़ासियों को बता दें कि यह मैच भास्कर इलेवन को चैलेंज करके रखा गया था। विपक्षियों ने जीत का दावा भी पहले ही ठोक दिया था। भास्कर के रणबांकुरों ने कैप्टन आलोक सिंह रघुवंशी की अगुवाई में मीडिया इलेवन के दावें की हवा निकाल दी। यह भी गौर करने वाली बात है कि विपक्षी टीम के कुठ खिलाड़ी भास्कर परिवार के ही सदस्य हैं। उन खिलाड़ियों ने भी भास्कर इलेवन को हराने के लिए पुरजोर कोशिश की, लेकिन भास्कर परिवार के सहयोग से भास्कर इलेवन की टीम सभी अपेक्षाओं पर खरी उतरी। बता दें कि विपक्षी टीम ने विभिन्न टीमों से हुए मुकाबले में लगातार सात मैचों में जीत दर्ज की है। इसी घमंड में उन्होंने भास्कर इलेवन को चैलेंज कर दिया। भास्कर इलेवन ने इस चैलेंज को कबूलते हुए उनके ताबूत में कील ठोक दी। विपश्री टीम के खिलाड़ी भास्कर के रणबांकुरे के जौहर देखकर चारों खाने चित हो गए। आज सुबह टास जीतकर मीडिया इलेवन के कप्तान मोहित ने पहले फील्डिंग करने का निर्णय लिया। ओपनर बल्लेबाज कप्तान आलोक सिहं रघुवंशी और दिनेश भट्ट ने मीडिया को शानदार शुरुआत दी। मैच के दूसरी ही गेंद पर कप्तान ने स्टेट पर शानदार चौका जमाया। मीडिल आर्डर के बल्लेबाज सन्नी (95), राहुल, नितिन यादव ने शानदार बल्लेबाजी कर मीडिया इलेवन के लिए 20 ओवरों में 201 रनों का लक्ष्य रखा। जवाब में खेलते हुए मीडिया इलेवन के ओपनर बल्लेबाजों मोहित और सुनील ने शानदार शुरुआत दी। इन दोनों खिलाड़ियों के आउट होने के बाद टीम हतोत्शाहित हो गई। हालांकि मीडिल आर्डर के बल्लेबाज तरसेम दियोगण ने अच्छी बल्लेबाजी कर अपनी टीम को विजय लक्ष्य के नजदीक पहुंचा दिया, लेकिन राहुल श्रीवास्तव, आकाश रावल, सन्नी, दिनेश ने अपनी चतुराई भरी गेंदबाजी से निचले कम के बल्लेबाजों को झका दिया और मीडिया इलेवन को 18 रनों से मात दी। अंत में भास्कर इलेवन के खिलाड़ी मैदान पर जीत के नारे लगाते हुए अपने दफ्तर पहुंचे और दफ्तर के सामने भास्कर परिवार के लोगों ने कप्तान सहित सभी खिलाड़ियों का स्वागत किया।
टीम- आलोक सिंह रघुवंशी (कप्तान), नितिन यादव (उपकप्तान), दिनेश भट्ट, राहुल श्रीवास्तव, आकाश रावल, सन्नी, महेश, प्यार सिंह, अमित, मुकेश, सुनील।
मैच जीतने पर भास्कर के स्थानीय संपादक राजीव सिंह, सिटी चीफ कुमार अभिमन्यु, विशेष संवाददाता अशोक सिंघी, योगेंऱद भदौरिया, सिटी डेस्क इंचार्ज नवीन गुप्ता, सीनियर सब एडिटर अनिल भारदाज, मनीष सिंह, चीफ फोटोगाफर कुलदीप काला ने विजयी टीम के सदस्यों को शुभकामनाएं दी।
Wednesday, June 4, 2008
बाप रे बाप
पेट्रोल-5, डीजल-3, रसोईं गैस-50 रुपए महंगी
दिन-ब-दिन बढ़ रही महंगाई की मार, ऊपर से जब सरकार ने पेट्रोल की कीमत 5 रु, डीजली की 3 रु, तथा रसोई गैस की 50 रुपए बढ़ दी तो सभी लोगों के चेहरे से हवाईयां उड़ने लगी। ये नई कीमतें आज मध्यरात्रि से लागू हो जाएंगी। हालांकि गांववासियों को कुछ राहत मिली है। मिट्टी के तेल के कीमत में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
महंगाई दर वैसे ही आसमान छू रही है, उस पर पेट्रोल-डीजल के दामों में बढोतरी से गरीब तबके के साथ-साथ मिडिलक्लास लोग भी पिसेंगे। खासतौर से रसोईं गैस के दामों में अचानक की गई 50 रुपए की बढोतरी ने घरेलू महिलाओं के खर्च बढ़ा दिए हैं।
सरकार ने इनके दामों में बढोतरी करके खुद के पैर में कुल्हाड़ी मार ली है। इसका फायदा अगले लोकसभा चुनाव में एनडीए उठा सकती है।
इस खबर पर आप भड़ासियों की राय है।
दिन-ब-दिन बढ़ रही महंगाई की मार, ऊपर से जब सरकार ने पेट्रोल की कीमत 5 रु, डीजली की 3 रु, तथा रसोई गैस की 50 रुपए बढ़ दी तो सभी लोगों के चेहरे से हवाईयां उड़ने लगी। ये नई कीमतें आज मध्यरात्रि से लागू हो जाएंगी। हालांकि गांववासियों को कुछ राहत मिली है। मिट्टी के तेल के कीमत में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
महंगाई दर वैसे ही आसमान छू रही है, उस पर पेट्रोल-डीजल के दामों में बढोतरी से गरीब तबके के साथ-साथ मिडिलक्लास लोग भी पिसेंगे। खासतौर से रसोईं गैस के दामों में अचानक की गई 50 रुपए की बढोतरी ने घरेलू महिलाओं के खर्च बढ़ा दिए हैं।
सरकार ने इनके दामों में बढोतरी करके खुद के पैर में कुल्हाड़ी मार ली है। इसका फायदा अगले लोकसभा चुनाव में एनडीए उठा सकती है।
इस खबर पर आप भड़ासियों की राय है।
Monday, May 12, 2008
बहन की शादी
२२ अप्रैल को हिमगिरी एक्स. से घर के लिए रवाना हुआ। स्टेशन पर पहुंचने पर, गाड़ी पर बैठने पर मुझे जो खुशी महसूस हुई, वह प्रगट नहीं कर सकता। मेरे चेहरे की खुशी मेरे साथियों ने पढ़ लिया था। टेन सफर वैसे मुझे अच्छा नहीं लगता है, लेकिन घर के नाम पर सब कुछ अच्छा लगता है। बनारस पहुंचते ही एक शादी अटेंड किया। बैग सहित शादी में पहुंच गया। मुझे देख चौकीदार ने बाहर ही रोक लिया। कहा-झोला झक्कड़ लेकर कहां जा रहे हो। जब मैंने उसे बताया कि मैं भी शादी में आया हूं। तब उसने हंसकर मुझे अंदर जाने दिया। अंदर जाने के बाद मेरे परिवार वाले भौचक्का रह गए। काफी खुश हुए। २४ अप्रैल को दोस्त विवेक दूबे की शादी थी। विवेक पुलिस में भती है। इसके एक दिन बाद ही बहन के तिलक में सारा कामकाज संभालना पड़ा। बहुत अच्छे से तिलक संपन्न हुआ। २६ अप्रैल को दोस्त धनंजय तिवारी की शादी थी। इसके बाद बहन की शादी में जुट गया। दो मई को बहन श्वेता की शादी थी। आफिस की तरफ से उसे ३१०० का चेक मिला। शादी में परिवार के सभी सदस्य इकट्ठा हुए। बाहर से सभी बहन, भाई शामिल हुए। चार बहनों में श्वेता सबसे छोटी थी। इसलिए उसकी शादी को लेकर पहले से ही परिवारवालों में खुशी थी। काफी कुछ सोच रखा था मम्मी-पापा एक के बाद एक सभी दोस्तों की शादी में शामिल हुआ। बहुत खुशी हुई कि इस १५ दिनों की छुट्टी में सभी शादी बढियां से संपन्न हो गई।
Sunday, April 13, 2008
कानपुर ने बचा ली इज्जत

आखिर कानपुर की पिच ने भारतवासियों की इज्जत बचा ली। टीम इडिया के धुरंधरों ने िस्पनरों के मदद वाली पिच पर साउथ अफ्रीका को तीसरे टेस्ट में आठ विकेट से मात देकर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज १-१ से बराबरी कर ली। या दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि जिस तरह साउथ अफ्रीका ने दूसरा टेस्ट तीन दिनों में ही समाप्त कर दिया, ठीक उसी तरह धोनी के धुरंधरों ने साउथ अफ्रीका को तीसरे दिन ही हराकर बदला चुका लिया।
इस जीत में कानपुर की पिच भी काफी हद तक सहायक मानी जा रही है। वैसे तो मैं लुधियाना में हूं, पर वहां स्टेडियम में मौजूद रिपोटॆरों तथा क्यूरेटर से मालूम पड़ा कि यह पिच खास तौर से स्पिनरों को मदद कर रही थी, जिसका लाभ टीम इंडिया के स्पिनरों को मिला और तीसरा टेस्ट टीम इंडिया ने आसानी से जीत लिया। इस जीत में सौरव गांगुली की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता, जिसने पहली पारी में 87 और दूसरी पारी में नाबाद 13 रन बनाए। जिसके एवज में उन्हें मैन आफ द मैच के पुरस्करा से नवाजा गया।
वहीं धोनी की हिम्मत की भी दाग देनी होगी, जिन्होंने हरभजन से गेंदबाजी की शुरुआत कराई। हरभजन ने भी अपने कप्तान के भरोसे को कायम रखकर दूसरी पारी में साउथ अफ्रीका के चार विकेट उखाड़ फेंके। उन्हें मैन आफ द सीरीज पुरस्कार मिला। कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि कानपुर (ग्रीनपार्क) की पिच की भी सराहना करनी होगी, जिसने हमारी इज्जत बचा ली।
जय भड़ास
टीम इंडिया
Monday, March 31, 2008
अप्रैल फूल बनाया बच्चे को दूध की जगह दारू पिलाया।
Thursday, March 13, 2008
पिस्टल वाला भड़ासी बनना पड़ेगा
रात करीब १२ बजे सूचना मिली कि यशवंत भाई साब पर किसी ने हमला बोल दिया है। इसके बाद कुछ न समझ में आ रहा था कि क्या करें, क्या न करें। ऊपर से फोन भी नहीं लग रहा था। जी चाह रहा था कि अभी नोएडा पहुंच जाएं, पर घर पर फोन करने के बाद मालूम हुआ कि भाई साब को हल्की चोटें आई हैं और वे ठीक हैं। गाड़ी खुद चलाकर आए हैं। तब जाकर जान में जान आई। कुछ समय बाद ही उनका फोन भी आ गया। बोले कि भाई तुम क्यों घबड़ा रहे हो। मुझे कुछ नहीं हुआ है। इन कायर लोगों से हम डरते थोड़े ही नहीं है। अभी हमें बहुत जंग लड़ना है और सबमें जीत हासिल करनी है। जो हुआ सो हुआ। तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बाद रातभर सोचता रहा। सोचा कि उठाउं पिस्टल और उन सालों को खोज-खोज कर भून डालूं।
सुबह जगा तो मालूम हुआ कि गांव के ही लड़के ने एक मास्टर साब को गोली मार दी है। बस उनका कसूर यही था कि उन्होंने उसे नकल करते पकड़ लिया था। सो मैं उन कायर लोगों से बस यही कहना चाहता हूं कि हमें भी पिस्टल उठाना आता है। खुलकर सामने आएं, तो बताएं कि हम भड़ासी किस मिट्टी के बने हुए हैं। पिस्टल चलाने में कोई हिचक नहीं होगी। बस एक आवाज निकलेगी........ठांय, ठांय और राम-नाम सत्य।
जय भड़ास
जय यशवंत
जय पिस्टल
सुबह जगा तो मालूम हुआ कि गांव के ही लड़के ने एक मास्टर साब को गोली मार दी है। बस उनका कसूर यही था कि उन्होंने उसे नकल करते पकड़ लिया था। सो मैं उन कायर लोगों से बस यही कहना चाहता हूं कि हमें भी पिस्टल उठाना आता है। खुलकर सामने आएं, तो बताएं कि हम भड़ासी किस मिट्टी के बने हुए हैं। पिस्टल चलाने में कोई हिचक नहीं होगी। बस एक आवाज निकलेगी........ठांय, ठांय और राम-नाम सत्य।
जय भड़ास
जय यशवंत
जय पिस्टल
Saturday, March 8, 2008
मीडिया या लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ?
मीडिया में ग्लोबलाइजेशन का असली चेहरा उजागर होता जा रहा है। विदेशी पूंची से संचालित मीडिया ने पुरानी अवधारणा को सिरे से नकार दिया है कि वह आज भी लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। विदेशी पूंजी के सहारे उसे चौतरफा लाभ दिखाई दे रहा है। अब मीडिया अपने पाठकों व दशॆकों को ही बुराई लगने लगी है। ग्लोबलाइजेशन की मदद से मीडिया ने पुराने आदशॆ को तिलांजलि देकर मुनाफा बाजार के नए मंत्र को स्वीकार कर लिया है। मीडिया के इस कदम के चलते उसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। अगर मीडिया मुनाफाखोरों से संचालित होगी, तो उसके फ्युचर की कल्पना की जा सकती है।
हालांकि यह भी है कि हिन्दी पत्रकारिता भी अपने आकार व सज्जा में सुंदर हो गई है। सरकुलनेशन भी उनका अंगेजी अखबारों से कहीं अधिक है। बाजार की मांग व पाठकों की पसंद को ही हिन्दी पत्रकारिता के लोग पूरा कर रहे हैं। इसके आधार पर वे क्रिकेट, काइम, कामेडी, सिनेमा व सेक्स को परोस रहे हैं।
जय भड़ास
जय हमशक्ल भड़ास
हालांकि यह भी है कि हिन्दी पत्रकारिता भी अपने आकार व सज्जा में सुंदर हो गई है। सरकुलनेशन भी उनका अंगेजी अखबारों से कहीं अधिक है। बाजार की मांग व पाठकों की पसंद को ही हिन्दी पत्रकारिता के लोग पूरा कर रहे हैं। इसके आधार पर वे क्रिकेट, काइम, कामेडी, सिनेमा व सेक्स को परोस रहे हैं।
जय भड़ास
जय हमशक्ल भड़ास
क्रेडिट लेना सीखो
यशवंत जी का मेल पढ़कर बहुत खुशी हुई। उन्होंने मेल में हमशक्ल भड़ासी के बजाय आलोक सिंह रघुवंशी करने का सलाह दिया। उनका कहना था कि अगर कुछ भी लिख-पढ़ रहे हो, तो उसका क्रेडिट लेना भी सीखो। बस मैंने अपने गुरु का कहना मान झटपट नाम चेंज कर दिया।
Thursday, March 6, 2008
दो बच्चों को जुड़वा तो तीन बच्चों को तिड़वा क्यों नहीं?
सामान्य रूप से महिलाएं एक समय में एक बच्चे को जन्म देती हैं। कभी-कभार दो या दो से अधिक बच्चों का जन्म होता है। दो बच्चों को हम जुड़वां बच्चे कहते हैं, तो एक साथ तीन बच्चें पैदा होंगे, तो हमें उसे तिड़वां बोलना चाहिए। ठीक जैसे अमेरिका में एक महिला ने तीन बच्चों को एक साथ जन्म दिया। तीनों की शक्ल एक जैसी मिलती है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा अजूबा २० करोड़ बच्चों के जन्म के बाद ही होता है। ऐसे हम पत्रकार बंधु मिला-मिलाया आइटम ही पचा जाते हैं, जैसे कि ऊपर वाला न्यूज है। उसके अंदर जाकर जानने की कोशिश नहीं करते।
आइए हम जानते हैं कि जुड़वां या तिड़वां बच्चे कैसे पैदा होते हैं। मासिक धमॆ के दस दिन बाद से १८ दिन तक महिलाओं के प्रजनन अंगों से एक प्रकार का अंडा पैदा होता है। इसे ओवम कहते हैं। इस अवधि में जब महिला और पुरुष का संयोग होता है तो पुरुष के वीयॆ में उपस्थित स्पर्मो में से एक स्पमॆ इस अंडे में प्रवेश कर जाता है। अंडे में स्पमॆ के प्रवेश कर जाने की किया को ही गर्भाधान यानी महिला गभॆवती हो जाती है।
कभी-कभार ऐसा होता है कि गर्भाधान के बाद अंडा दो हिस्सों में बंट जाता है। गर्भाशय में दो बच्चों के रूप में विकास होता रहता है। परिणाम होता है कि ऐसी महिला के एक ही साथ दो बच्चे पैदा होते हैं। इस तरह पैदा हुए बच्चों का रंग-रूप और आकार एक जैसा होता है।
कभी-कभार दूसरी संभावना यह है कि मनुष्य के वीयॆ से दो स्पमॆ महिला के दो अलग-अलग अंडों में प्रवेश कर जाते हैं। इससे दो बच्चों का जन्म होता है, पर उनके रंग-रूप और आकार में अंतर होता है।
कुछ यूं ही रानी कौशल्या और कैकेई ने रानी सुमित्रा को दो फांक सेव दिया था और सुमित्रा ने भरत और शत्रुधन को जन्म दिया था।इस तरह के कई उदाहरण हैं, ब्राजील की एक महिला ने १० बच्चों को जन्म दिया था। स्पेन और चीन में भी १० बच्चों को पैदा करने का रिकाडॆ है। इस तरह के संसार में कई उदाहरण हैं।
अगर आप भाई बंधुओं को इसके बारे में अन्य जानकारी है, तो कृपया जानकारी दें।
आइए हम जानते हैं कि जुड़वां या तिड़वां बच्चे कैसे पैदा होते हैं। मासिक धमॆ के दस दिन बाद से १८ दिन तक महिलाओं के प्रजनन अंगों से एक प्रकार का अंडा पैदा होता है। इसे ओवम कहते हैं। इस अवधि में जब महिला और पुरुष का संयोग होता है तो पुरुष के वीयॆ में उपस्थित स्पर्मो में से एक स्पमॆ इस अंडे में प्रवेश कर जाता है। अंडे में स्पमॆ के प्रवेश कर जाने की किया को ही गर्भाधान यानी महिला गभॆवती हो जाती है।
कभी-कभार ऐसा होता है कि गर्भाधान के बाद अंडा दो हिस्सों में बंट जाता है। गर्भाशय में दो बच्चों के रूप में विकास होता रहता है। परिणाम होता है कि ऐसी महिला के एक ही साथ दो बच्चे पैदा होते हैं। इस तरह पैदा हुए बच्चों का रंग-रूप और आकार एक जैसा होता है।
कभी-कभार दूसरी संभावना यह है कि मनुष्य के वीयॆ से दो स्पमॆ महिला के दो अलग-अलग अंडों में प्रवेश कर जाते हैं। इससे दो बच्चों का जन्म होता है, पर उनके रंग-रूप और आकार में अंतर होता है।
कुछ यूं ही रानी कौशल्या और कैकेई ने रानी सुमित्रा को दो फांक सेव दिया था और सुमित्रा ने भरत और शत्रुधन को जन्म दिया था।इस तरह के कई उदाहरण हैं, ब्राजील की एक महिला ने १० बच्चों को जन्म दिया था। स्पेन और चीन में भी १० बच्चों को पैदा करने का रिकाडॆ है। इस तरह के संसार में कई उदाहरण हैं।
अगर आप भाई बंधुओं को इसके बारे में अन्य जानकारी है, तो कृपया जानकारी दें।
Wednesday, March 5, 2008
ब्लॉग किस चिड़िया का नाम है
भड़ास-२ शुरू करने के बाद अधिकांश लोगों ने सराहा तो कुछ ने कहा कि कुछ नया करना था। उनकी बातें सुनकर मैं थोड़ा सा भी विचलित नहीं हुआ। दरअसल भड़ास से मुझे ब्लाग के बारे में जानकारी हुई कि ये चीज क्या है। कानपुर आईनेक्स्ट में था, तभी से ब्लाग और भड़ास के बारे में जानकारी हुई। पहली बार जब भड़ास देखा तो समझा कि पोटॆल होगा, वेबसाइट होगा। बाद में जब इसकी आदत सी हो गई तो मालूम हुआ कि ब्लाग किस चिड़िया का नाम है। भड़ास में पत्रकार बंधुओं के लिए शुरू किया गया कनबितयां काफी फेमस हुआ। कनबतिया के द्वारा ही राजीव जी के लुधियाना भास्कर ज्वाइन की खबर मिली। यहां तक कि उनके मोबाइल नंबर भी आसानी से मिल गए। सो मुझे लुधियाना आने में कोई दिक्कत नहीं हुई। घुमा-फिराकर यह कहना चाहता हूं कि भड़ास से कई लोगों को कुछ अलग करने की चेष्टा मिली है, चाहे वो मानें या न मानें।
प्रवीण ने तोड़ दी कमर
प्रवीण ने तोड़ दी कमरकामनवेल्थ बैंक सीरीज के बेस्ट आफ थ्री फाइनल में टीम इंिडया पहला और दूसरा फाइनल जीतकर सीरीज अपने नाम कर िलया। इसके बाद पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। जहां हम कुम्भकरण की तरह सोते थे, पर मैच देखने के िलए सुबह ही जग गया। अंततः टीम इंिडया के जुझारू प्रदर्शन की बदौलत आस्टेिलया को मुंह की खानी पड़ी। दूसरे फाइनल मैच में प्रवीण को मैन आफ द मैच तथा आस्टेिलया के नाथन ब्रेकन को मैन आफ द सीरीज अवाडॆ से नवाजा गया। प्रवीण ने िजस तरह से आस्टेिलया में िदग्गजों की मौजूदगी के बावजूद अपनी उप िस्थित दजॆ कराई है, वह कािबलेतारीफ है। फाइनल में प्रवीण के प्रदर्शन को सभी लोगों ने सराहा। प्रवीण के अलावा अगर िकसी िखलाड़ी ने प्रभावित िकया तो वे थे मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर, जिन्होंने दोनों फाइनल मैचों में शानदार बैटिंग की। पहले मैच में शतक तो दूसरे मैच में ९१ रन बनाकर उन्होंने अपने आलोचकों के मुंह पर ताला लगा दिया। फाइनल जीतने के बाद हरभजन सिंह और श्रीसंत के रिएक्शन देखने लायक थे। जहां हरभजन ने लगे रहो टीम इंडिया का नारा दिया वहीं श्रीसंत ने जय भारत माता दी, कहकर सबके िदल को छू िलया। वैसे हम बात कर रहे थे यूपी के होनहार खिलाड़ी प्रवीण कुमार की, जिन्होंने शुरुआत मेरठ ग्राउंड से की। जब मैं मेरठ में था, तब उसका नाम प्रकाश में आया, तब मुझे कतई अंदेशा नहीं था कि यही प्रवीण कुमार आज आस्टेिलया को चारों खाने िचत करने में हीरो बनेगा। कानपुर गया, तब भी रणजी मैचों के दौरान मेरी मुलाकात उससे हुई। एक बार होटल लैंडमाकॆ में हमारी मुलाकात हुई, तब मैं मो. कैफ का इंटरव्यू लेने गया था। प्रवीण कुमार के साथ ज्योति यादव व शिवाकांत भी थे। प्रवीण से बातचीत के दौरान मुझे अहसास हो गया िक एक िदन यह लड़का जरूर देश का नाम करेगा। बातचीत के दौरान ही उसने .बड़े भाई यशपाल जी का नाम िलया। बता दूं िक अगर प्रवीण कुमार को सबसे पहले किसी ने सराहा था, तो वे थे यशपालजी। अभी हाल ही में मेरठ में आयोिजत मीडिया टूनामेंट ( जो िक हर साल यशपाल जी आयोिजत करते हैं) में प्रवीण कुमार को होनहार खिलाड़ी का अवाडॆ भी िदया गया। हालांिक प्रवीण कुमार के आस्टेिलया में होने के चलते उनके बड़े भाई को अवाडॆ सौंपा गया।
भड़ास2: सस्ती लोकप्रियता का एक सस्ता माध्यम
इसे भड़ास की लोकप्रियता कहें या उसके प्रति मेरा सम्मान। अब चाहे यशवंत भाई साहब इसे बुरा क्यों न मानें, मैंने उनसे बिना पूछे भड़ास२ शुरू कर दिया है। मैं और अबरार ने मिलकर भड़ास२ के बनाने के बरे में सोचा और चट बिचार, पट भड़ास२ शुरू कर दिया। भड़ास२ में मैंने मुतो कम हिलाओ ज्यादा का ब्लॉग वर्णन डाला है। वहीं मेरे साथी लफ्ज़ ब्लॉग चलाने वाले अबरार अहमद का कहना है की भड़ास२ सस्ती लोकप्रियता का एक सस्ता माध्यम है। अभी तो मैं इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहता हूँ। इसके बारे में केवल सचिन लुधियानवी को ही मालूम है , पर ब्लॉग के इस छोटी सी दुनिया में यह बात किसी से नहीं छिपेगी।
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