पेट्रोल-5, डीजल-3, रसोईं गैस-50 रुपए महंगी
दिन-ब-दिन बढ़ रही महंगाई की मार, ऊपर से जब सरकार ने पेट्रोल की कीमत 5 रु, डीजली की 3 रु, तथा रसोई गैस की 50 रुपए बढ़ दी तो सभी लोगों के चेहरे से हवाईयां उड़ने लगी। ये नई कीमतें आज मध्यरात्रि से लागू हो जाएंगी। हालांकि गांववासियों को कुछ राहत मिली है। मिट्टी के तेल के कीमत में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
महंगाई दर वैसे ही आसमान छू रही है, उस पर पेट्रोल-डीजल के दामों में बढोतरी से गरीब तबके के साथ-साथ मिडिलक्लास लोग भी पिसेंगे। खासतौर से रसोईं गैस के दामों में अचानक की गई 50 रुपए की बढोतरी ने घरेलू महिलाओं के खर्च बढ़ा दिए हैं।
सरकार ने इनके दामों में बढोतरी करके खुद के पैर में कुल्हाड़ी मार ली है। इसका फायदा अगले लोकसभा चुनाव में एनडीए उठा सकती है।
इस खबर पर आप भड़ासियों की राय है।
Wednesday, June 4, 2008
Monday, May 12, 2008
बहन की शादी
२२ अप्रैल को हिमगिरी एक्स. से घर के लिए रवाना हुआ। स्टेशन पर पहुंचने पर, गाड़ी पर बैठने पर मुझे जो खुशी महसूस हुई, वह प्रगट नहीं कर सकता। मेरे चेहरे की खुशी मेरे साथियों ने पढ़ लिया था। टेन सफर वैसे मुझे अच्छा नहीं लगता है, लेकिन घर के नाम पर सब कुछ अच्छा लगता है। बनारस पहुंचते ही एक शादी अटेंड किया। बैग सहित शादी में पहुंच गया। मुझे देख चौकीदार ने बाहर ही रोक लिया। कहा-झोला झक्कड़ लेकर कहां जा रहे हो। जब मैंने उसे बताया कि मैं भी शादी में आया हूं। तब उसने हंसकर मुझे अंदर जाने दिया। अंदर जाने के बाद मेरे परिवार वाले भौचक्का रह गए। काफी खुश हुए। २४ अप्रैल को दोस्त विवेक दूबे की शादी थी। विवेक पुलिस में भती है। इसके एक दिन बाद ही बहन के तिलक में सारा कामकाज संभालना पड़ा। बहुत अच्छे से तिलक संपन्न हुआ। २६ अप्रैल को दोस्त धनंजय तिवारी की शादी थी। इसके बाद बहन की शादी में जुट गया। दो मई को बहन श्वेता की शादी थी। आफिस की तरफ से उसे ३१०० का चेक मिला। शादी में परिवार के सभी सदस्य इकट्ठा हुए। बाहर से सभी बहन, भाई शामिल हुए। चार बहनों में श्वेता सबसे छोटी थी। इसलिए उसकी शादी को लेकर पहले से ही परिवारवालों में खुशी थी। काफी कुछ सोच रखा था मम्मी-पापा एक के बाद एक सभी दोस्तों की शादी में शामिल हुआ। बहुत खुशी हुई कि इस १५ दिनों की छुट्टी में सभी शादी बढियां से संपन्न हो गई।
Sunday, April 13, 2008
कानपुर ने बचा ली इज्जत

आखिर कानपुर की पिच ने भारतवासियों की इज्जत बचा ली। टीम इडिया के धुरंधरों ने िस्पनरों के मदद वाली पिच पर साउथ अफ्रीका को तीसरे टेस्ट में आठ विकेट से मात देकर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज १-१ से बराबरी कर ली। या दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि जिस तरह साउथ अफ्रीका ने दूसरा टेस्ट तीन दिनों में ही समाप्त कर दिया, ठीक उसी तरह धोनी के धुरंधरों ने साउथ अफ्रीका को तीसरे दिन ही हराकर बदला चुका लिया।
इस जीत में कानपुर की पिच भी काफी हद तक सहायक मानी जा रही है। वैसे तो मैं लुधियाना में हूं, पर वहां स्टेडियम में मौजूद रिपोटॆरों तथा क्यूरेटर से मालूम पड़ा कि यह पिच खास तौर से स्पिनरों को मदद कर रही थी, जिसका लाभ टीम इंडिया के स्पिनरों को मिला और तीसरा टेस्ट टीम इंडिया ने आसानी से जीत लिया। इस जीत में सौरव गांगुली की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता, जिसने पहली पारी में 87 और दूसरी पारी में नाबाद 13 रन बनाए। जिसके एवज में उन्हें मैन आफ द मैच के पुरस्करा से नवाजा गया।
वहीं धोनी की हिम्मत की भी दाग देनी होगी, जिन्होंने हरभजन से गेंदबाजी की शुरुआत कराई। हरभजन ने भी अपने कप्तान के भरोसे को कायम रखकर दूसरी पारी में साउथ अफ्रीका के चार विकेट उखाड़ फेंके। उन्हें मैन आफ द सीरीज पुरस्कार मिला। कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि कानपुर (ग्रीनपार्क) की पिच की भी सराहना करनी होगी, जिसने हमारी इज्जत बचा ली।
जय भड़ास
टीम इंडिया
Monday, March 31, 2008
अप्रैल फूल बनाया बच्चे को दूध की जगह दारू पिलाया।
Thursday, March 13, 2008
पिस्टल वाला भड़ासी बनना पड़ेगा
रात करीब १२ बजे सूचना मिली कि यशवंत भाई साब पर किसी ने हमला बोल दिया है। इसके बाद कुछ न समझ में आ रहा था कि क्या करें, क्या न करें। ऊपर से फोन भी नहीं लग रहा था। जी चाह रहा था कि अभी नोएडा पहुंच जाएं, पर घर पर फोन करने के बाद मालूम हुआ कि भाई साब को हल्की चोटें आई हैं और वे ठीक हैं। गाड़ी खुद चलाकर आए हैं। तब जाकर जान में जान आई। कुछ समय बाद ही उनका फोन भी आ गया। बोले कि भाई तुम क्यों घबड़ा रहे हो। मुझे कुछ नहीं हुआ है। इन कायर लोगों से हम डरते थोड़े ही नहीं है। अभी हमें बहुत जंग लड़ना है और सबमें जीत हासिल करनी है। जो हुआ सो हुआ। तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बाद रातभर सोचता रहा। सोचा कि उठाउं पिस्टल और उन सालों को खोज-खोज कर भून डालूं।
सुबह जगा तो मालूम हुआ कि गांव के ही लड़के ने एक मास्टर साब को गोली मार दी है। बस उनका कसूर यही था कि उन्होंने उसे नकल करते पकड़ लिया था। सो मैं उन कायर लोगों से बस यही कहना चाहता हूं कि हमें भी पिस्टल उठाना आता है। खुलकर सामने आएं, तो बताएं कि हम भड़ासी किस मिट्टी के बने हुए हैं। पिस्टल चलाने में कोई हिचक नहीं होगी। बस एक आवाज निकलेगी........ठांय, ठांय और राम-नाम सत्य।
जय भड़ास
जय यशवंत
जय पिस्टल
सुबह जगा तो मालूम हुआ कि गांव के ही लड़के ने एक मास्टर साब को गोली मार दी है। बस उनका कसूर यही था कि उन्होंने उसे नकल करते पकड़ लिया था। सो मैं उन कायर लोगों से बस यही कहना चाहता हूं कि हमें भी पिस्टल उठाना आता है। खुलकर सामने आएं, तो बताएं कि हम भड़ासी किस मिट्टी के बने हुए हैं। पिस्टल चलाने में कोई हिचक नहीं होगी। बस एक आवाज निकलेगी........ठांय, ठांय और राम-नाम सत्य।
जय भड़ास
जय यशवंत
जय पिस्टल
Saturday, March 8, 2008
मीडिया या लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ?
मीडिया में ग्लोबलाइजेशन का असली चेहरा उजागर होता जा रहा है। विदेशी पूंची से संचालित मीडिया ने पुरानी अवधारणा को सिरे से नकार दिया है कि वह आज भी लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। विदेशी पूंजी के सहारे उसे चौतरफा लाभ दिखाई दे रहा है। अब मीडिया अपने पाठकों व दशॆकों को ही बुराई लगने लगी है। ग्लोबलाइजेशन की मदद से मीडिया ने पुराने आदशॆ को तिलांजलि देकर मुनाफा बाजार के नए मंत्र को स्वीकार कर लिया है। मीडिया के इस कदम के चलते उसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। अगर मीडिया मुनाफाखोरों से संचालित होगी, तो उसके फ्युचर की कल्पना की जा सकती है।
हालांकि यह भी है कि हिन्दी पत्रकारिता भी अपने आकार व सज्जा में सुंदर हो गई है। सरकुलनेशन भी उनका अंगेजी अखबारों से कहीं अधिक है। बाजार की मांग व पाठकों की पसंद को ही हिन्दी पत्रकारिता के लोग पूरा कर रहे हैं। इसके आधार पर वे क्रिकेट, काइम, कामेडी, सिनेमा व सेक्स को परोस रहे हैं।
जय भड़ास
जय हमशक्ल भड़ास
हालांकि यह भी है कि हिन्दी पत्रकारिता भी अपने आकार व सज्जा में सुंदर हो गई है। सरकुलनेशन भी उनका अंगेजी अखबारों से कहीं अधिक है। बाजार की मांग व पाठकों की पसंद को ही हिन्दी पत्रकारिता के लोग पूरा कर रहे हैं। इसके आधार पर वे क्रिकेट, काइम, कामेडी, सिनेमा व सेक्स को परोस रहे हैं।
जय भड़ास
जय हमशक्ल भड़ास
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